मेरा नाम सोनाली है। मैं अभी-अभी 17 साल की हुई हूँ। एक छोटे से कस्बे में, जहाँ टूटी-फूटी सड़कें और आधी-अधूरी ख्वाहिशें ही ज़िंदगी की पहचान थीं, मैंने जवानी की दहलीज़ पर कदम रखा था। हमारा घर क्या था, बस ईंटों का एक ढाँचा था जिसमें हवा और बारिश आसानी से घुस जाती थी। गरीबी एक ऐसी अदृश्य रस्सी थी जिसने हमारे हर सपने को जकड़ रखा था।
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गरीबी का शिकार: वो माँ जो बन गई शैतान की सीढ़ी | Emotional Social Story
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