हेलो दोस्तों, आज की इस कहानी में आपका स्वागत है। मेरा नाम काजल है, और मैं 20 साल की हूं। मेरी मां का निधन तब हुआ था जब मैं सिर्फ 5 साल की थी। तब से लेकर आज तक, मेरे पिता ने ही मेरी देखभाल की और मुझे पाल-पोस कर बड़ा किया। पिछले कुछ दिनों से पिताजी यूयू अपने ऑफिस के काम से बाहर गए हुए थे। आज जब वे वापस लौटे, तो उनके साथ एक औरत भी थी। यह औरत कोई और नहीं, बल्कि मेरे पिता की नई पत्नी थी, जिससे उन्होंने हाल ही में शादी की थी। पिताजी और उस औरत दोनों के गले में शादी के नेकलेस थे, और उनका अंदाज कुछ अलग ही था।
पिताजी ने मुझे बुलाकर कहा, "काजल, यह तुम्हारी मां मनीषा है। हम दोनों ने शादी कर ली है।" पिताजी की शादी हो चुकी थी, और इससे मुझे कोई दिक्कत नहीं थी। दरअसल, मैं खुश थी क्योंकि पिताजी ने आज तक अपने बारे में कभी नहीं सोचा था। पिताजी अभी 38 साल के ही थे, और मैंने भी उन्हें कई बार कहा था कि उन्हें दूसरी शादी करनी चाहिए। क्योंकि पिताजी की खुशी में ही मेरी खुशी थी। अब वह औरत, मनीषा, मेरी नई मां बन गई थी।
शादी के बाद जब पिताजी और मेरी नई मां घर आए, तो एक लड़का हाथ में बैग लेकर घर में आया। इससे पहले मैंने उस लड़के को कभी नहीं देखा था। इसलिए मैंने उससे पूछा, "तुम कौन हो?" लड़के के जवाब देने से पहले ही पिताजी ने कहा, "यह तुम्हारा छोटा भाई है, और इसका नाम नवीन है। यह मनीषा की पहली शादी से हुआ बेटा है।" यानी अब मेरी नई मां के साथ-साथ नवीन भी हमारे घर में रहने वाला था।
मैंने पिताजी से पूछा, "पिताजी, यह मेरा छोटा भाई है या बड़ा? क्योंकि इसे देखने पर मुझे छोटा नहीं लगता।" पिताजी ने कहा, "नवीन अभी 16 साल का है, और तुम 20 साल की हो। तो यह तुम्हारा छोटा भाई ही हुआ ना?" मैंने भी उसे अपना छोटा भाई मान लिया। हालांकि उसकी दाढ़ी-मूंछ देखकर वह मुझे छोटा नहीं लग रहा था। नवीन बहुत शांत दिखाई दे रहा था, लेकिन मुझे नहीं पता था कि वह वास्तव में जैसा दिख रहा था, वैसा नहीं था।
हमारे घर में दो कमरे थे और एक किचन था। एक कमरा मेरा था, और दूसरा पिताजी का। अब मेरी नई मां पिताजी के साथ उनके ही कमरे में रहती थी। पिताजी ने मुझसे कहा था कि तुम नवीन को अपने कमरे में रख लेना। मुझे नवीन को अपने कमरे में रखने में कोई दिक्कत नहीं थी, लेकिन वह मुझसे शर्मा रहा था। इसलिए वह अपनी मां के कमरे में ही रहता था।
एक दिन रात को खाना खाने के बाद, पिताजी मेरे कमरे में आए और उन्होंने मुझसे कहा, "काजल, नवीन अभी छोटा है। वह ज्यादा बात नहीं करता, लेकिन अब तुम्हें ही उससे बात करानी होगी। अब से तुम दोनों हमेशा एक साथ ही रहोगे। नवीन रोज अपनी मां के पास ही सोता है, जिसकी वजह से मैं अपनी पत्नी के साथ ठीक से समय नहीं बिता पा रहा हूं। तुम समझो कि मेरा आशय क्या है। तुम नवीन से दोस्ती करो और धीरे-धीरे उसे अपने कमरे में सोने के लिए मनाओ।"
मैं समझ गई कि पिताजी का क्या मतलब है। मैंने पिताजी के सामने हां में सिर हिला दिया। पहले ही दिन से मेरी नवीन से दोस्ती बढ़ने लगी। सुबह को जब पिताजी और मेरी नई मां ऑफिस चले गए, तो मैं भी हमेशा की तरह अपने कॉलेज चली गई। और जाते-जाते नवीन को उसके नए स्कूल छोड़ दिया। गर्मी का मौसम था, इसलिए जल्द ही नवीन की गर्मी की छुट्टियां होने वाली थी। यह उससे दोस्ती करने का अच्छा मौका था।
अगले कुछ दिनों तक यही सिलसिला चलता रहा। जब गर्मी की छुट्टियां शुरू हुईं, तो मैं भी उससे बातें करने के लिए घर पर ही रही। उस दिन मां और पापा अपने समय पर ऑफिस चले गए। उनके जाने के बाद, नवीन ने सोचा होगा कि मैं भी कॉलेज जाऊंगी। लेकिन उस दिन मैं कॉलेज नहीं गई, बल्कि घर पर ही रुक गई। सुबह 9:00 बजे तक मैं घर का सारा काम निपटा चुकी थी। नवीन पिताजी के कमरे में बैठकर किताब पढ़ रहा था। मैं उससे बातचीत करने के लिए अपने पिता के कमरे में गई। मुझे देखकर नवीन ने बस एक प्यारी सी मुस्कान दी और फिर से अपनी गर्दन झुकाकर किताब पढ़ने लगा। वह बहुत शर्मीला लड़का लग रहा था।
मैं उसके पास गई और उसके हाथ से किताब ले ली। फिर भी नवीन कुछ नहीं बोला। मैंने कहा, "नवीन, जब से मैं इस कमरे में आई हूं, अगर मैं तुम्हें थोड़ा भी छेड़ दूं, तो तुम मुझसे बात करने को तैयार नहीं होते। मुझे लगता है कि तुम मुझे अपनी बड़ी बहन नहीं मानते हो।" मेरी बात सुनकर नवीन ने सिर्फ सिर हिलाया। मैंने उससे फिर से बात करना शुरू किया। मैंने कहा, "भाई, गर्मी की छुट्टियां पढ़ाई के लिए नहीं हैं, बल्कि मजमस्ती करने के लिए भी हैं। और तुम हो कि छुट्टियों में भी पढ़ रहे हो। चलो, हॉल में बैठते हैं और कोई मूवी देखते हैं।"
इस पर नवीन ने कहा, "मैं अभी मूवी देखने के लिए बड़ा नहीं हुआ हूं।" नवीन की बात सुनकर मैंने हंसते हुए कहा, "अरे वाह, छोटू, आप बोल भी सकते हो!" नवीन मेरी बात सुनकर हंस पड़ा। मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और उसे हॉल में ले आई। हमने टीवी चालू किया और कार्टून देखने लगे। मैं उससे छोटी-छोटी बातें करती रही, और वह अब मेरी बातों का जवाब देने लगा था। धीरे-धीरे वह मुझसे घुलमिल गया।
अब जब भी मेरे माता-पिता घर पर नहीं होते, तो मैं नवीन के साथ समय बिताती थी। वह बाहर जाकर लड़कों के साथ बैठकर खेलता, और कभी-कभी मैं उसे कैरम भी सिखाती थी। जल्दी ही हम दोनों दोस्त बन गए। एक दिन मैंने नवीन से कहा, "अब हम दोस्त बन गए हैं। आज से तुम अपने माता-पिता के कमरे में मत सोने जाना।" उसने जवाब दिया, "नहीं, नहीं, मैं अपनी मां के साथ ही सोऊंगा।"
मैं चाहती थी कि नवीन माता-पिता के कमरे से बाहर आ जाए, ताकि उनके बीच की दूरियां खत्म हो सकें। मैंने नवीन से कहा, "तुम अपने माता-पिता की चिंता मत करो। मुझे भी अपने कमरे में अकेलापन महसूस होता है। अगर तुम्हें एक दोस्त के रूप में मेरे कमरे में आओगे, तो मैं तुम्हारे साथ अपना कमरा साझा करने के लिए तैयार हूं। इसके लिए तुम्हें पिताजी से बात करने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि पिताजी भी चाहते हैं कि तुम मेरे कमरे में सो।"
अगली रात जब हम खाना खा चुके थे, तो नवीन मेरे कमरे में आया। मैं बिस्तर लगा रही थी, तभी मां भी मेरे कमरे में आ गई। मां ने नवीन से कहा, "सोने का समय हो गया है। वैसे भी, तुम अभी काजल के कमरे में क्या कर रहे हो?" मां की बात सुनकर नवीन थोड़ा डरने लगा। मैं समझ नहीं पा रही थी कि वह उनसे इतना क्यों डरता है। मैंने मां से कहा, "मां, आज से नवीन मेरे ही कमरे में सोएगा।"
मां ने तुरंत जवाब दिया, "नहीं, नहीं, वह तुम्हें परेशान करेगा, सोने नहीं देगा।" मैंने मां के करीब जाकर उनके कान में कहा, "मां, जब से आपकी और पिताजी की शादी हुई है, आप अपने पति को ठीक से समय नहीं दे पाई होंगी। अब से आप चिंता मत करना, नवीन मेरे साथ मेरे कमरे में ही रहेगा।" मां को पिताजी के साथ समय बिताने का मौका मिल रहा था, लेकिन मां ऐसा नहीं चाहती थी। वह नवीन को अपने कमरे में ले जाने लगी, लेकिन मैंने उन्हें रोक दिया।
तभी पिताजी वहां आए और उन्होंने भी नवीन से कहा, "तुम काजल के कमरे में सो जाओ।" पिताजी की बात सुनकर मां ने भी हामी भर दी। लेकिन जाते-जाते मां ने मेरे कान में फुसफुसाया, "अगर तुम नवीन को अपने कमरे में रखने के लिए इतनी जिद कर रही हो, तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन सावधान रहना, वह भी अब बड़ा हो रहा है।" मैंने अपनी मां की बातों को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया। मुझे लगा था कि वह किसी मामूली बात के लिए ऐसा कह रही थी।
उस रात नवीन मेरे कमरे में मेरे बिस्तर पर सो रहा था। सोने के कुछ देर बाद, मुझे अपने शरीर पर किसी का हाथ महसूस हुआ। मैं गहरी नींद में थी, लेकिन फिर भी मुझे यह अजीब सा महसूस हुआ। मैंने अपनी आंखें खोली और देखा कि नवीन ने अपना हाथ जल्दी से हटा लिया। मैंने सोचा कि शायद उसे अपनी मां के साथ सोने की आदत होगी, इसलिए मैंने इसे नजरअंदाज कर दिया और उसका हाथ फिर से नहीं हटाया।
अगली रात करीब 1 बजे, मेरी नींद अचानक खुल गई। मैंने देखा कि नवीन बिस्तर पर नहीं था। मैं उसे ढूंढने के लिए उठी, लेकिन वह किचन या बाथरूम में भी नहीं था। फिर मैं मां और पिताजी के कमरे की ओर गई, जहां मैंने नवीन को उनके कमरे में झांकते हुए पाया। मैं हैरान रह गई कि वह इतनी रात को वहां क्या कर रहा था। जब मैं कमरे के पास पहुंची, तो देखा कि कमरे का दरवाजा थोड़ा खुला हुआ था, और नवीन मां और पिताजी की निजी चीजों को देख रहा था। मैंने तुरंत उसका हाथ खींचा और उसे कमरे से दूर ले गई। मैंने गुस्से में कहा, "क्या तुम पागल हो गए हो? नवीन, वे तुम्हारे माता-पिता हैं, और इस समय उनके कमरे में ताक-झांक करना बिल्कुल भी सही नहीं है।"
मेरी बात सुनकर नवीन सिर झुकाकर चुपचाप मेरे कमरे में चला गया। जब मैं कमरे में गई, तो देखा कि वह बिस्तर के किनारे बैठा हुआ था, और उसका चेहरा उदास था। मैं उसके पास जाकर बैठी और अपना हाथ उसके हाथ पर रखा। तभी मेरे हाथ पर आंसू गिर पड़े। मैंने उसकी तरफ देखा, तो उसकी आंखों में आंसू थे। मैंने उससे पूछा, "ऐसा क्या हुआ जो तुम रोने लगे?" उसने रंधे हुए स्वर में कहा, "बहन, मुझे मां की बहुत याद आती है। उनके बिना मुझे नींद नहीं आती।"
उसकी यह बात सुनकर मैं उसे गले से लगा लिया और उसे एक मां की तरह अपने पास रखा। मैं उसकी भावनाओं को समझ सकती थी। लेकिन मैंने भी सोचा कि माता-पिता को एक दूसरे के साथ समय बिताना जरूरी है। अगर नवीन बार-बार उनके बीच जाएगा, तो वे एक दूसरे को समय नहीं दे पाएंगे। मैं घर में सबसे समझदार थी, और नवीन मुझसे छोटा था। हालात ऐसे थे कि मुझे सारी जिम्मेदारी उठानी पड़ रही थी।
मैं नवीन को मां के कमरे में नहीं जाने दे सकती थी, लेकिन उसका रोना भी मुझसे देखा नहीं जा रहा था। मैं चाहती थी कि उसे एक मां की तरह समझूं और उसका ख्याल रखूं। इसलिए मैंने उसे मां की तरह गले लगाया। लेकिन धीरे-धीरे नवीन का पैर फिसलने लगा, और मैं उसे एक छोटे भाई की तरह और करीब से महसूस करने लगी। उसके स्पर्श से मैं उसकी भावनाओं को अलग तरह से महसूस कर सकती थी। अचानक नवीन ने अपना हाथ मेरी पीठ पर फिराना शुरू कर दिया। मैंने तुरंत उसे धक्का देकर अपने से दूर कर दिया और उसे सोने को कहा।
कुछ देर बाद, नवीन फिर से मेरे पास आया और मेरे शरीर पर अपना हाथ रख दिया। वह नींद में था और बड़बड़ा रहा था, "मां, मुझे छोड़कर मत जाओ।" मुझे लगा कि उसे मां की याद आ रही है, इसलिए उस वक्त मैंने उसका हाथ अपने बदन से नहीं हटाया और सो गई।
अगली सुबह मैं थोड़ी देर से उठी। मम्मी-पापा ऑफिस गए हुए थे। नवीन हमेशा की तरह हॉल में बैठकर टीवी देख रहा था। मैं उठी और सीधे बाथरूम में चली गई। नहाने के बाद, मैं तौलिया में ही कमरे में वापस आई। मैंने सोचा कि अभी मेरे कमरे में कौन आएगा और क्यों आएगा, इसीलिए बिना किसी चिंता के कपड़े ढूंढने लगी। तभी अचानक कमरे का दरवाजा खुला, और सामने नवीन खड़ा था। वह मुझे ऐसे कपड़ों में देखकर चौंक गया और एक बार नीचे भी देखा। मैं उसकी आंखों में नहीं देख सकी और तुरंत पीछे घूमकर नवीन को कमरे से बाहर जाने को कहा। नवीन बाहर जाने को तैयार नहीं था, तो मैंने गुस्से में दोबारा उसे बाहर जाने को कहा। फिर वह बाहर गया।कमरे से निकलते ही मैंने जो ड्रेस हाथ में आई, उसे पहन लिया और बाहर आकर नवीन से पूछा, "तुम अचानक कमरे में क्यों आ गए?" उसने जवाब दिया, "मैं यह देखने आया था कि आप जाग गई हैं या नहीं, क्योंकि मैं सुबह से टीवी देखकर बोर हो गया था।" नवीन को नाराज करने का मेरे पास कोई कारण नहीं था, इसलिए मैंने आगे कुछ नहीं कहा और उसे समझाया, "तुम अपना ख्याल रखना। आज मैं तुम्हें अपने दोस्त के घर ले जाऊंगी। वहां उसका भाई भी तुम्हारी उम्र का है। तुम्हें वहां मजा आएगा और एक नया दोस्त भी मिल जाएगा।"
मैं अपने दोस्त के घर जाने के लिए नवीन के साथ निकली। हम दोनों अपनी स्कूटी से उसके घर की ओर जा रहे थे। रास्ते में मैंने देखा कि नवीन मुझे इधर-उधर नजरें घुमाते हुए देख रहा है। उसने कहा, "दीदी, मुझे बाहर जाना बहुत पसंद है, लेकिन माता-पिता हमें कहीं भी ले जाने को तैयार नहीं होते हैं।" मैंने नवीन को समझाते हुए कहा, "तुम्हारी माता-पिता दोनों कामकाजी हैं। वे अपने काम में व्यस्त रहते हैं, इसलिए उनके पास समय नहीं होता कि वे तुम्हें बाहर घुमाने ले जाएं। लेकिन चिंता मत करो, मैं समझती हूं कि तुम्हें बाहर घूमना पसंद है। कभी-कभी मैं तुम्हें बाहर घुमाने ले जाऊंगी, ठीक है ना?" नवीन मेरी बात सुनकर खुश हो गया।
जल्दी ही हम मेरे दोस्त के घर पहुंच गए। मेरे दोस्त का भाई नवीन से थोड़ा छोटा लग रहा था। दोनों बच्चों में अभी से ही दाढ़ी और मूंछे आने लगी थी, जबकि वे अभी युवावस्था तक नहीं पहुंचे थे। मेरी दोस्त शीतल ने नवीन को मेरे साथ देखा और मजाक में मुझसे कहा, "काजल, तुमने मुझे अपने नए रिश्ते के बारे में कुछ नहीं बताया। तुम अपने प्रेमी को सीधे मेरे घर ले आई हो।" तो मैं ऐसे चौंक गई, जैसे मैं सच में उसकी गर्लफ्रेंड हो। मैंने शीतल को समझाते हुए कहा, "यह मेरा बॉयफ्रेंड नहीं है, यह तो मेरा छोटा भाई है, और तुम्हारा भी।" फिर मैंने उसे अपने पिता की दूसरी शादी के बारे में बताया।
शीतल हंसते हुए बोली, "अरे अच्छा, यह तेरा भाई है। मुझसे गलती हो गई, क्षमा करना।" शीतल के घर में हम दोनों ने काफी बातें की। नवीन शीतल के भाई के साथ खेल रहा था और एक मासूम बच्चे की तरह लग रहा था। वे दोनों अपनी उम्र के हिसाब से जवान नहीं लग रहे थे। शायद उनकी मां ने उन्हें अच्छे संस्कार दिए थे। मुझे उनमें कोई गलत बात नहीं दिखी।
उस रात जब हम खाना खा रहे थे, तो अचानक मुझे लगा कि मेज के नीचे से कोई बार-बार मेरे पैर को छू रहा है। मैंने नीचे देखा, तो पाया कि यह नवीन का पैर था। मुझे समझ नहीं आया कि वह जानबूझकर ऐसा कर रहा था या अनजाने में। मैंने उसे डांटने के बजाय उसकी तरफ गुस्से से देखा, तो उसने तुरंत अपना पैर हटा लिया। बाद में जब मैं किचन साफ करके अपने कमरे में जा रही थी, तो देखा कि मां हॉल में नवीन से बात कर रही थी। मुझे लगा कि वे उसे डांट रही होंगी। जब मैं वहां पहुंची, तो मां मुझे देखकर हंसने लगी। मैं भी मुस्कुराई और अपने कमरे में चली गई। नवीन भी मेरे पीछे-पीछे आ गया।
कुछ देर बाद, मां मेरे कमरे में दो गिलास दूध लेकर आई। उन्होंने एक गिलास मुझे दिया और दूसरा नवीन को। फिर उन्होंने मेरे सिर पर हाथ रखकर कहा, "काजल बेटा, जब से तुम घर आई हो, मैंने तुम्हें ज्यादा करीब नहीं रखा है। इसके बजाय, तुम मेरी जगह एक मां की तरह नवीन की देखभाल कर रही हो। मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि मुझे तुम जैसी समझदार बेटी मिली है।" मैंने मां की बात सुनी और उनके प्यार भरे शब्दों से मन ही मन खुश हो गई। मेरी मां मुझसे बहुत प्यार करती थी। जब उन्होंने मेरे लिए दूध लाकर दिया, तो मैंने बड़े प्रेम से उसे पिया। उस समय मुझे ऐसा लगा, जैसे मेरी असली मां को मैंने किसी और मां के रूप में देखा हो।अगले कुछ दिन ऐसे ही बीत गए। अब जब मैं सुबह उठती थी, तो बिस्तर पर बहुत उलझन महसूस होती थी। इतनी भी टेढ़ी नींद नहीं आती कि बिस्तर की चादर इस कदर अस्त-व्यस्त हो जाए। लेकिन फिर भी मैंने इसे नजरअंदाज कर दिया। कुछ दिनों बाद, अचानक मेरे पेट में दर्द होने लगा। एक दिन सुबह जब मैं उठी, तो पेट के निचले हिस्से में काफी दर्द महसूस हुआ। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि इस बारे में अपने पिता से कैसे बात करूं।
उस दिन जब मैं बिस्तर पर बैठी हुई थी, तो नवीन जाग चुका था। उसने मुझे अजीब नजरों से देखा और उठते ही मेरा हाथ पकड़ लिया। फिर उसने पूछा, "तुम ठीक हो?" मुझे उस समय कुछ अजीब लगा, लेकिन मैंने उसे कुछ नहीं बताया। मैं बिस्तर से उठकर कमरे से बाहर चली गई और मां से बात करने लगी। जब मैंने मां की ओर देखा, तो उनका चेहरा गंभीर लगा। इस कारण मैंने अपनी बात बदल दी।
उस दिन मां पिताजी के साथ ऑफिस नहीं गई और रिक्शे से अपने ऑफिस चली गई। पिताजी से बात करते समय भी उनका चेहरा बहुत गंभीर दिख रहा था। मुझे लगा कि शायद मां और पिताजी के बीच कोई विवाद चल रहा है, लेकिन मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं थी। मैंने पिताजी को ऑफिस जाते समय रोका और पूछा, "पिताजी, क्या आपके और मां के बीच कोई बहस हुई है?" पिताजी ने बिना कुछ कहे सिर हिलाया और ऑफिस की ओर चले गए।
अगले दो-चार दिन भी ऐसे ही बीते। पेट दर्द से परेशान होकर, आखिरकार मैंने अपनी मां को इसके बारे में बताया। मां मुझे हॉस्पिटल ले गई, जहां मेरा चेकअप हुआ। जब रिपोर्ट आई, तो मां ने अपना सिर झुका लिया। फिर उन्होंने मुझसे पूछा, "काजल बेटा, मुझे एक सवाल का सच्चाई से जवाब दो। क्या तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है?" मैंने हैरानी से पूछा, "मां, आप यह सवाल क्यों पूछ रही हैं?" मां ने कहा, "क्योंकि तुम्हारी रिपोर्ट में लिखा है कि तुम गर्भवती हो।"
मां की बात सुनते ही मेरी आंखों में आंसू आ गए। मैंने मां से कहा, "मां, क्या आपने रिपोर्ट ठीक से देखी है? मैं गर्भवती कैसे हो सकती हूं? मेरा कोई बॉयफ्रेंड भी नहीं है।" मां और मैं एक बार फिर एक दूसरे को देखने लगे। अब मेरा पूरा शक दूर हो गया था। मैंने महसूस किया कि वह मेरे बहुत करीब आ चुका था। मैंने तुरंत मां से कहा, "मां, यह सब नवीन का किया धरा है। पिछले कुछ दिनों से मैंने अपने कमरे की चादर भी फटी हुई देखी है। मैं नवीन को नहीं छोडूंगी।"
जैसे ही मैंने यह कहा, मां ने मुझे शांत किया, "काजल, शांत हो जाओ। हो सकता है नवीन ने गलती की हो, लेकिन यह सारी बातें अपने पापा के सामने मत बताना। तुम जानती हो कि वे हार्ड पेशेंट हैं। अगर वे बहुत ज्यादा सोचेंगे, तो उनकी तबीयत और बिगड़ सकती है। मैं नवीन को जल्दी ही हमारे घर से भेज दूंगी। तुम अपने पापा को यह बातें मत बताना। मैं तुम्हें इस गर्भवती स्त्री से भी छुटकारा दिलाऊंगी।"
मां ने मुझे समझाया। फिर मैंने मां को गले लगाया। मां ने मेरे आंसू पोंछे, और हम घर की ओर चल पड़े। उस रात हमेशा की तरह, मैंने नवीन को अपने कमरे में सोने दिया। मुझे जल्दी ही नींद आ गई। कुछ देर बाद, मुझे एहसास हुआ कि मेरे कमर पर किसी का हाथ है। जब मैंने आंखें खोली, तो देखा कि नवीन मेरे पास लेटा हुआ था। मैंने गुस्से में आकर उस पर चिल्लाया और उसे अपने कमरे से बाहर निकाल दिया।
मेरी आवाज सुनकर पिताजी जाग गए और मेरे कमरे में आ गए। इससे पहले कि मैं गुस्से में कुछ बोल पाती, मां ने स्थिति संभाल ली। मां ने कहा, "बहुत दिन हो गए, नवीन अपनी बहन के साथ सो रहा है। शायद अब वह कुछ दिनों के लिए अपनी मां के साथ सोना चाहता हो। कोई बात नहीं, नवीन अब कुछ दिनों तक मेरे कमरे में ही सोएगा।" मां ने नवीन का हाथ पकड़ा और उसे अपने साथ ले गई।
उस रात मैं सो नहीं पाई। अचानक मेरी आंख लग गई। जैसे ही मैंने नींद में करवट बदली, मेरा हाथ किसी के पैर पर जा पड़ा। तभी मेरी नींद खुल गई। मैंने घबराकर लाइट जलाई और देखा कि मेरे बगल में एक छोटा सा लड़का था, जो मेरे सिर पर हाथ फेर रहा था। मैं डर के मारे जोर-जोर से चिल्लाने लगी। मेरी आवाज सुनकर पिताजी कमरे में आए। मैं रो रही थी, और मां भी सदमे में थी।
पिताजी ने पूछा, "काजल, क्यों रो रही हो? क्या हुआ?" भावुक होकर मैंने पिताजी को सब कुछ बताया। उस वक्त पिताजी ने गुस्से में आकर नवीन को थप्पड़ मार दिया। तभी नवीन ने कहा, "काजल, तुम किस बारे में बात कर रही हो? यह सच है कि मैं तुमसे प्यार करता हूं, लेकिन मैंने तुम्हारे साथ ऐसा घृणित कार्य कभी नहीं किया। और तुम गर्भवती कैसे हो सकती हो? किसने कहा तुमसे यह सब?"
उस वक्त मां ने कहा, "कैसी रिपोर्ट? मेरे पास तो कोई रिपोर्ट नहीं है।" मां ने मुझसे झूठ क्यों बोला? यह सवाल मेरे मन में घर कर गया था। फिर मां ने पापा से कहा, "अब आपकी बेटी मेरे बेटे पर बिना वजह आरोप लगा रही है। अब हद हो गई है। मैं इस घर में बिल्कुल नहीं रह सकती। तुम्हें मेरे और मेरे बेटे के नुकसान का हिसाब देना होगा।"
मम्मी और पापा के बीच ऐसी कड़वी बातें सुनकर, मैं पूरी तरह से हिल गई थी। मैं गर्भवती थी, और इस स्थिति में मम्मी-पापा की यह बहस सुनकर मेरा मानसिक संतुलन बिगड़ रहा था। तभी मुझे अचानक चक्कर आया, और मैं गिर गई। धीरे-धीरे मेरी आंखें बंद होने लगी। तभी नवीन दौड़ता हुआ आया और मेरे चेहरे पर पानी के छींटे मारे। उसने मुझे अपने हाथों से पानी पिलाया। इस बीच, मां मुझसे और पापा से दूर मुंह फेर कर खड़ी रही।
फिर नवीन ने बात शुरू की। उसने अपनी मां से कहा, "मुझे माफ कर दो, मैडम, लेकिन अब मैं तुम्हारे खेल में तुम्हारा साथ नहीं दे सकता। आज तुमने मेरे चरित्र पर सवाल उठाकर हद कर दी।" उसने मेरी तरफ देखते हुए कहा, "काजल, प्लीज मुझ पर भरोसा करो। मैंने तुम्हारे साथ कुछ भी गलत नहीं किया, और तुम गर्भवती नहीं हो। यह सब मैडम का खेल है। अब मैं उनकी सारी सच्चाई तुम्हारे सामने लाऊंगा।"
फिर नवीन ने अपनी पूरी कहानी बताई। "मैं 16 साल का नहीं हूं, बल्कि 22 साल का हूं, और इस मैडम का कोई बेटा नहीं है। मैंने एक थिएटर कंपनी में भी काम किया है, और वहीं मेरी मुलाकात इस मैडम से हुई थी। मैंने पहले भी इस मैडम के साथ ऐसे नाटक किए हैं। मैडम ने मुझे इस्तेमाल किया है। उनके साथ मैंने जो भी नाटक किए, उससे मैंने समझा कि वह असल में क्या करती हैं। थोड़ी पढ़ाई के बाद, यह मैडम एक कंपनी में नौकरी करती थी। फिर वह अपनी खूबसूरती का फायदा उठाकर कंपनी के मालिक या मैनेजर को अपने प्रेम जाल में फंसा लेती थी। वह खुद को उनके सामने बहुत हताश और बेचारी दिखाती थी और बताती थी कि उनका एक 16 साल का बेटा है, जिसका ठीक से भरण-पोषण नहीं हो पाता। फिर जब उनकी शादी उस अमीर व्यक्ति से हो जाती थी, तो कुछ दिनों बाद वह किसी ना किसी कारण से उस व्यक्ति से तलाक ले लेती थी और अंत में भारी मात्रा में धन प्राप्त करती थी। उन्हें मिलने वाले गुजारा भत्ता के साथ-साथ, वह मेरा खर्च भी उठाती थी। काजल, तुम्हारे पापा इस मैडम के चौथे शिकार हैं। पहले मुझे सिर्फ पैसे से भुगतान करना पड़ता था, लेकिन आज उन्होंने मेरे चरित्र पर उंगली उठाई है। मैं नहीं जानता था कि मैडम मेरे साथ ऐसा कुछ करेंगी। काजल, यह सच है कि मैं तुमसे प्यार करने लगा था, लेकिन मैंने तुम्हारे साथ कभी कुछ भी गलत नहीं किया।"
पापा और मैंने यह सुनकर चौंक गए। बिना कुछ जाने-समझे, हम दोनों एक धोखेबाज महिला के जाल में फंस गए थे। पिछले कुछ दिनों से मम्मी और पापा के बीच बहस चल रही थी, और मम्मी जानबूझकर किसी ना किसी वजह से झगड़ा कर रही थी, क्योंकि अब वह पिताजी से तलाक लेना चाहती थी और उनसे ढेर सारे पैसे ऐंठना चाहती थी।
पिताजी ने मुझसे कहा, "काजल, मैंने तुम्हें हमारी बहस के बारे में कुछ नहीं बताया था, क्योंकि मुझे लगा था कि इससे बच्चों पर बुरा असर पड़ेगा। लेकिन कई बार बच्चों को कुछ बातें बताना जरूरी होता है।" उस समय हमने नवीन का धन्यवाद किया, क्योंकि समय रहते उसने हमें सच बता दिया था और सच बताकर अपने ऊपर लगे दाग को भी मिटा दिया।
पिताजी ने उस धोखेबाज महिला की शिकायत पुलिस में की, और पुलिस उसे पकड़ कर ले गई। इसमें नवीन की कोई गलती नहीं थी। उसने कोई अपराध नहीं किया था। वह जो कुछ भी कर रहा था, वह पैसे के लिए कर रहा था, लेकिन उसने गलत इंसान का साथ दिया था। इसीलिए उसे छह महीने की सजा हुई।
जब सब कुछ तय हो गया, तो पिताजी मुझे अस्पताल ले गए और मेरा चेकअप करवाया। मेरे पेट दर्द और अन्य परेशानियों का कारण एक जीवाणु संक्रमण था। मैं बहुत कम पानी पीती थी, और गर्मी का मौसम था, इसलिए मुझे संक्रमण हो गया था। इससे मेरे पेट में दर्द होने लगा। उस समय मेरी मां मुझे अस्पताल ले गई, जहां उसने कुछ अतिरिक्त पैसे देकर मेरे गर्भवती होने की झूठी रिपोर्ट बनवा दी। इसके बाद उसने मुझे गुमराह भी किया। लेकिन उसे अपनी इस गलती की सजा मिल गई।
उस दिन के बाद से, मेरे पिताजी ने मेरी शादी का ख्याल अपने दिमाग से बिल्कुल निकाल दिया। अब पिताजी मेरे बारे में और भी सतर्क हो गए हैं।
तो दोस्तों, आपको यह कहानी कैसी लगी?

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